ग्रिड-टाइड सोलर क्या है?
आपका रूफटॉप सिस्टम हमेशा ग्रिड से जुड़ा रहता है। दिन में पैनल जो बिजली बनाते हैं, वह पहले आपके घर को मिलती है; बची हुई बिजली नेट मीटर के ज़रिए वापस ग्रिड में जाती है। रात में या कम धूप वाले दिनों में आप हमेशा की तरह ग्रिड से बिजली लेते हैं — किसी बैटरी की ज़रूरत नहीं और सप्लाई में कोई रुकावट नहीं।
जनरेशन बनाम कंज़म्पशन
आपके सिस्टम का आउटपुट दिन भर बदलता रहता है, दोपहर के आसपास सबसे ज़्यादा होता है, जबकि आपकी खपत आपकी अपनी दिनचर्या के हिसाब से चलती है — सुबह और शाम। नेट मीटरिंग यह अंतर अपने आप एडजस्ट कर देती है, इसलिए बिलिंग साइकल में आप सिर्फ़ ग्रिड से ली गई नेट यूनिट्स के लिए ही बिल भरते हैं।
नेट मीटरिंग क्या है?
नेट मीटरिंग आपके DISCOM का वह तरीका है जिससे वह आपके द्वारा ली गई और वापस भेजी गई बिजली, दोनों मापता है और अंतर का हिसाब करता है। जब आप इस्तेमाल से ज़्यादा बिजली एक्सपोर्ट करते हैं, तो आपका नेट मीटर उल्टा चलता है और वे यूनिट्स आगे की खपत के लिए जमा हो जाती हैं।
ऑफ-ग्रिड के बजाय "ग्रिड-टाइड" क्यों?
ऑफ-ग्रिड सिस्टम को सूरज ढलने के बाद इस्तेमाल के लिए बैटरी में बिजली स्टोर करनी पड़ती है, जिससे लागत और मेंटेनेंस दोनों काफ़ी बढ़ जाते हैं। ग्रिड-टाइड सिस्टम ग्रिड को ही बैकअप की तरह इस्तेमाल करते हैं — आसान, सस्ता, और PM Surya Ghar सब्सिडी के लिए एलिजिबल, जो सिर्फ़ ग्रिड-कनेक्टेड सिस्टम को कवर करती है।
जानना चाहते हैं आपको कितना बड़ा सिस्टम चाहिए?
हमारी kW गाइड में छत के एरिया और डेली आउटपुट के हिसाब से सिस्टम साइज़ की तुलना करें।
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